जयदेव जयदेव जय विश्वकर्मा
जयदेव जयदेव जय विश्वकर्मा।
आरती ओवाळू तुज पुरुषोत्तमा॥
अधिकमास माघ शुक्ल त्रयोदशी।
प्रातःकाळी भीमातीरी तू प्रगटसी।
पंचमुख दशभुज आयुधे शोभती।
पितांबर धारी पंचमुकुट झळकती॥
जयदेव जयदेव जय विश्वकर्मा।
आरती ओवाळू तुज पुरुषोत्तमा॥
सकल देवामाजी अगाध तुझी करणी।
सृष्टी निर्माण करीसी तू परमवाणी।
तुझे नामसम गाता संकटे पळती।
मोक्षदाता तू कैवल्यमूर्ती॥
जयदेव जयदेव जय विश्वकर्मा।
आरती ओवाळू तुज पुरुषोत्तमा॥
पुंडलिका सगनिध विश्वज्ञ लोहदंड तीर्थे।
तेथे तव चरणी वसती सकळही तीर्थे।
चांगदेव म्हणे तू कृपासागरा।
आरती ओवाळू तुज विश्वंभरा॥
जयदेव जयदेव जय विश्वकर्मा।
आरती ओवाळू तुज पुरुषोत्तमा॥