नमिला गणपती, माऊली शारदा
नमिला गणपती, माऊली शारदा।
आता गुरुराजा दंडवत।। धृ।।
गुरुराया चरणी मस्तक ठेविले।
आपल्या स्तुतीला द्यावी मती।। १।।
गुरुराया तुज ऐसा नाही सखा।
कृपा करी रंका धरी हाता।। २।।
तुका म्हणे माता पिता, गुरु बंधू।
तूची कृपा सिंधू गणपती।। ३।।